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Monday, 2 September 2013

वर्ल्ड क्लास और थर्ड क्लास?

अमेरिका बनोगे? वर्ल्ड-क्लास कंट्री बनेगा इंडिया? आज अमेरिका विश्व शक्ति है तो यूँ ही नहीं है. सामने से टीम को लीड करने वाला लीडर होता है , न की मज़बूरी और संसाधनों के लिए रोने वाला. दंतेवाडा में 76 मरे, एक शब्द सहानुभूति का नहीं निकला मेरे देश के सिपहसालारों के. दिल्ली में देश की इज्ज़त लुट गयी 16 दिसम्बर को 8 दिन लगा दिए एक राटा रटाया भाषण देने में. देश के राष्ट्रपति के सामने जनता रीझ के मर गयी, साहब बाहर आने की हिम्मत नहीं जूटा पाए. एक लड़की के रूप में देश ने अपना सम्मान खो दिया लेकिन मजाल है कोई एक शब्द कह दे जो इस निराशा में कोई छोटी सी भी उम्मीद दिखा देता ?
1947 में आजाद हुए थे, उसके बाद सब ठीक था. फिर धीरे धीरे हम पिछड़ते गए. अमेरिका , जो कभी हमारे बराबर का सा होता दिख रहा था वो बहुत आगे निकल गया. आप जानते हैं हमारे देश की GDP कितनी है? मैं बता देता हूँ लगभग 1180 अरब डॉलर. हाँ बहुत बड़ी रकम है. इतनी बड़ी की आप और मैं तो शायद एक जनम में गिन भी न पायें. लेकिन इसमें खुश होने का क्या है?
 दुनिया की  2.42 % ज़मीन है हमारे पास, 17.5 % जनसँख्या है फिर हम क्यूँ एक पप्पू देश बने हुए हैं? नौकरियां है नहीं, ज़िन्दगी की कोई कीमत है नहीं, इलाज है नहीं, खाना है नहीं, पानी है नहीं , है क्या इस देश में? "मेरा भारत महान" बोलो , मैं भी बोलता हूँ तुम भी बोलो और बन जायेंगे हम बड़े. मन लो 15 अगस्त हर साल आज़ाद हैं आज़ाद हैं, फिर क्यूँ गुलामी सा लगता है?
जिस आजाद देश की आज़ादी के दिन भाषण देने वाला ही बुलेट प्रूफ कांच के बक्से में से बोलता है वो क्या आजाद है? बोलते हैं ये किया वो किया 66 साल में? क्या किया? 82 करोड़ लोगों की थाली में तो रोटी नहीं दे पाए जो अब चुनाव के टाइम झुनझुना दे रहे हो? जिस चीज़ पे दुःख होना चाहिए की 66 साल में केवल 37 लोगों को रोटी मिली उस चीज़ पे सीना ठोक रहे हैं की हमने ये किया वो किया.
कोई बोलता है खड़ा होके, 21वीं सदी भारत की होगी, ये होगा वो होगा, क्या होगा? क्या हुआ? लोग मरना बंद हो गए? जैसे हम देखता हैं बांग्लादेश को वैसे पूरा विश्व देखता है हमें, लूटा पीटा देश. क्यूँ?




अमेरिका में होता है 14 दिसम्बर 2012 को एक हमला एक स्कूल में , शाम को देश के सामने आके राष्ट्रपति दुःख व्यक्त करता है, उम्मीद बंधाता है देश को की "चिंता मत करो मैं हूँ". वो भाषण पढ़ते पढ़ते उसकी आँखों में आंसू आजाते हैं , जिससे साफ़ दिल को महसूस होता है है की कोई है हमारे दुःख में शामिल. दिखावा नहीं है वो. विडियो दिया है उस भाषण का. यहाँ दूरदर्शन पे ठीक है जैसे रेट रटाये भाषण दिए जा रहे हैं! शर्म आनी चाहिये मुझे और आपको जो हम इनके भरोसे बैठे हैं. और छोडो  "नाबालिग " है बोल के छोड़ दिया की जा बीटा कर और बलात्कार, माफ़ करना सरकार, अच्छे से तो छोडिये, बुरे से बुरे शासक भी आपके सामने शरमा जायेंगे!
ठोको सारे मिलके छाती की मेरी पार्टी ने ये किया मेरी पार्टी ने ये किया. जीते रहो यही जानवरों वाली ज़िन्दगी.करते रहो देश को इगनोर. हमें क्या मतलब? बने रहो शतुरमुर्ग क्या होगा?