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Thursday, 24 October 2013

बुरे फंसे बुढ़ापे में!

मेरे दिल में इस इंसान के लिए शुरू से सम्मान था और रहेगा, लेकिन आज की बात करें तो इस समय देश के सबसे ज्यादा काम आये  अब तक के सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह आज अपने ही घर में एक बिसरा दी गयी मूर्ति जैसे हो गए हैं. हालाँकि अभी तक उनके नाम के आगे सभी लोग "प्रधानमंत्री" और पीछे "जी" लगा रहे हैं लेकिन ये सब अब एक औपचारिकता की तरह है.
1991 की बात है जब देश में भयंकर आर्थिक संकट था, तब एक गबरू जवान ने सामने आके देश में कुछ जी सकने लायक माहौल बनाया. ये वही इंसान थे जो परदे के पीछे से देश के लिए काम करते रहे. साल 2004 में जब सोनिया जी ने अपने आप में एक बहुत बड़ा त्याग किया तो यही वो नाम था जो बिना किसी वाद-विवाद के सबने स्वीकार किया. मनमोहन सिंह को जब से प्रधान मंत्री बनाया गया है तब से उनसे एक चमत्कार की उम्मीद की गयी है और मुझे सच में नहीं पता की उन्होंने कोई चमत्कार किया है या नहीं. मुझे नहीं पता देश में वास्तविक तौर पे गरीबी कम हुई है या नहीं , देश में महंगाई कम हुई है या बढ़ी है वगैरह वगैरह लेकिन इतना यकीन है की मनमोहन सिंह उन लोगों में से हैं जिनको मैं इमानदारी के मामले में 10 में से 10 दे सकता हूँ.
मनमोहन सिंह भले ही ईमानदार हों, लेकिन उनकी एक बात जो मुझे हमेशा अखरती है वो है उनका ढुलमुल रवैया. हाँ वही रवैया जिससे साबित होता है की दिल्ली में बलात्कार होते रहें, देश की सीमा पे सैनिकों का अपमान होता रहे लेकिन दिल्ली की कुर्सी पे बैठे लोग अपना मुह नहीं खोलेंगे. और खोलेंगे भी तो बिलकुल आखिरी पड़ाव पे आके. 9 दिन लिए ज्योति सिंह पाण्डे के साथ हुए अन्याय पे मुह खोलने में, और सैनिकों की तो मौत पे मुह तक नहीं खोला इन्होने. खैर इस समय ये इंसान खुद इतना बेचारा बना हुआ है की तरस के अलावा कुछ नहीं है मेरे पास इन के लिए.
तरस क्यूँ? अरे भाई साहब जब कल के एक लड़के ने देश को इतना कुछ दे सके इंसान की सरे राह इतनी बुरी बेईज्ज़ती की तभी दिल से एक आह निकली, की नहीं यार मैंने कुछ गलत सुना है. मनमोहन सिंह जी के बारे में कम से कम कोई समझदार इंसान इस तरह के शब्द राष्ट्रीय स्तर पे नहीं बोल सकता. लेकिन नहीं जनाब हम गलत थे, कांग्रेस के ही उपाध्यक्ष ने उनका अपमान कर डाला था . मैं भले ही राजनैतिक तौर पर इस समय कांग्रेस से थोडा नाराज़ हूँ लेकिन एक बात तय है की कांग्रेस ने अपने सबसे इमानदार और देश के प्रति जवाबदेह इंसान को आज भुला दिया है. मेरी उम्र छोटी है लेकिन इतना जनता हूँ की सम्मान के हक़दार का सम्मान न हो तो कुछ गड़बड़ है.
यहाँ तक भी सब कुछ ठीकठाक था, लेकिन तभी पाकिस्तान की तरफ से खबर आई की उन्होंने मनमोहन सिंह जी को कुछ गलत शब्द बोले हैं. हालाँकि मुझे पता नहीं उन्होंने सच में ऐसा बोला या नहीं लेकिन फिर भी 125 करोड़ लोगों के नेतृत्व का अपमान करना सही नहीं है.
मनमोहन सिंह के प्रति मेरा सम्मान और मेरा प्यार कम इसलिए भी नहीं होता की देश के काम आने के साथ साथ वे अपनी पार्टी के लिए भी हमेशा वफादार रहे हैं . जिस को कांग्रेस प्रधानमंत्री बना रही है उस ने बचपने में भले ही उनका अपमान किया हो लेकिन मनमोहन सिंह ने कभी कुछ उल्टा जवाब नहीं दिया. वे आज तक कांग्रेस और राहुल को बचा ही रहे हैं.
आज एक नया ही केस जुदा है उनसे, कोयले का . सीबीआई भी पुछ्ताछ करेगी शायद उनसे, जिसके लिए उन्होंने खुद को तैयार भी बताया है. लेकिन जो भी है , आज कांग्रेस ने जो अच्छा किया है उसका श्रेय अध्यक्ष जी और उपाध्यक्ष जी  लेना चाहते हैं, लेकिन जो कुछ भी गलत हुआ है उसका ठीकरा बेचारे सरदारजी पर ???