ज्योति सिंह पांडे!
क्या लिखूं समझ नहीं आ रहा लेकिन अपने आप को रोक भी नही पा रहा हूँ! लड़का हूँ न, शर्म से सर झुका है तुम्हे संबोधित करते हुए. तुम्हे अपनी बहन मान के लिख रहा हूँ. आज पूरा एक साल हो गया ज्योति लेकिन इस एक साल में कुछ नहीं कर पाया मैं. किसी ने तुझे निर्भया कहा, किसी ने दामिनी. सबने बहुत कुछ कहा लेकिन आज भी पिछले एक साल से वही सब हो रहा है, मेरी बहन, तू आज जिंदा होती तो एक डॉक्टर होती. वाइट ब्लेजर और स्टेथोस्कोप होता तेरे पास. समाज में बहुत ऊँचे स्तर का रुतबा होता तेरा. लोग तुझे भगवन मान के तुझसे इलाज करवाने आते. मम्मी-पापा बहुत खुश होते जब तेरे नाम के आगे “डॉ.” लग जाता. शायद तेरे भी कुछ सपने थे, शायद बड़ी गाडी, बहुत बड़ा घर, वर्ल्ड टूर वगरह. जो तूने चाहा था वो तो नहीं हो पाया पूरा .
और तो और हम तो कभी मिले भी नहीं थे. तू जब छोटी रही होगी तब घर में तूने बहुत चंचलता से अपने घर और अपने आस-पास के माहौल को खुशनुमा बनाया होगा.तूने अपने मम्मी पापा और भाई-बहन की छोटी छोटी ख़ुशी का ध्यान रखा होगा. तेरे जन्मदिन पे सबने खुशियाँ भी मनाई होंगी. और आज देख, तुझे एक साल हो गया गए हुए.
कुछ ख़ास तो नहीं बदला मेरी ज़िन्दगी में. लेकिन पापा और मम्मी की ज़िन्दगी में शायद सब कुछ बदल गया है. अब मम्मी तेरे लिए टिफ़िन नहीं बनाती. पापा को तेरी शादी के लिए लड़का नहीं ढूँढना अब. भाइयों के लिए एक बहन क्या होती है शब्दों में नहीं लिखा जा सकता.
ज्योति, तू एक डॉक्टर नही बन पायी लेकिन एक आदर्श बन गयी है! आदर्श हर उस लड़की के लिए जो आज भी ये सब सह रही हैं. मुझे नहीं पता तेरे जाने के बाद इस एक साल में कितनी बच्चियों की मासुमता को कुचल दिया गया लेकिन बंद नहीं हुआ ये सब.
मैं तेरा सगा भाई तो नहीं हूँ, लेकिन एक बहन मेरे भी है. समझता हूँ की एक लड़की परिवार में क्या होती है. ज़िन्दगी में एक लड़की की क्या भूमिका है. सिर्फ माँ-पापा ने ही एक लड़की को नहीं खोया है बल्कि इस देश ने एक होनहार डॉक्टर, और एक जिंदादिल ज़िन्दगी को खो दिया. पिछले एक साल में बहुत ड्रामा हुआ है. हर इंसान के मन में गुसा है, लेकिन आज भी वही सब इन्टरनेट और बॉलीवुड का गन्दा खेल चल रहा है. मैं और पूरा देश उस दिन भी दुखी थे, आज भी दुखी हैं. फर्क इतना है की पिछले साल कम से कम कुछ लोगों ने नए साले पे ख़ुशी नहीं मनाई थी, इस साल शायद मम्मी-पापा के अलावा सब हनी सिंह के गानों पे पूरी रात नाच नाच के नए साल का स्वागत करेंगे.
तेरे गुनाहगार आज भी जिंदा हैं ज्योति लेकिन उन्हें जल्द ही सजा मिलेगी ऐसा मुझे यकीन है. मैं उन्हें तड़पते हुए देखना चाहता हूँ. उनकी आँखों से खून निकलते हुए और उन्हें अपने जन्म पे पछताते हुए. कोई उन्हें भले माफ़ कर दे, लेकिन एक भाई होने के नाते मैं नहीं कर सकता!
ज्योति, मैं शर्मिंदा हूँ मेरी बहन! तूने मुझे इस जन्म में तो राखी नहीं बाँधी थी. लेकिन एक दुआ है ऊपर वाले से की तेरा अगला जन्म मेरे घर में हो! मेरी बहन या मेरी बेटी के तौर पे! वादा है मेरा, पूरी जान लगा के भी तुझे एक राजकुमारी की तरह रखूँगा! एक ऐसी राजकुमारी जिसके प्रति सबके मन में सम्मान हो! और एक ऐसे माहौल में जिसमे लोगों को बच्चियों में “cuteness” नज़र आये, उनका शरीर नहीं!
और नहीं लिख पाउँगा ज्योति, हो सके तो.... प्लीज माफ़ कर देना !!!
- तेरा एक भाई!
क्या लिखूं समझ नहीं आ रहा लेकिन अपने आप को रोक भी नही पा रहा हूँ! लड़का हूँ न, शर्म से सर झुका है तुम्हे संबोधित करते हुए. तुम्हे अपनी बहन मान के लिख रहा हूँ. आज पूरा एक साल हो गया ज्योति लेकिन इस एक साल में कुछ नहीं कर पाया मैं. किसी ने तुझे निर्भया कहा, किसी ने दामिनी. सबने बहुत कुछ कहा लेकिन आज भी पिछले एक साल से वही सब हो रहा है, मेरी बहन, तू आज जिंदा होती तो एक डॉक्टर होती. वाइट ब्लेजर और स्टेथोस्कोप होता तेरे पास. समाज में बहुत ऊँचे स्तर का रुतबा होता तेरा. लोग तुझे भगवन मान के तुझसे इलाज करवाने आते. मम्मी-पापा बहुत खुश होते जब तेरे नाम के आगे “डॉ.” लग जाता. शायद तेरे भी कुछ सपने थे, शायद बड़ी गाडी, बहुत बड़ा घर, वर्ल्ड टूर वगरह. जो तूने चाहा था वो तो नहीं हो पाया पूरा .
और तो और हम तो कभी मिले भी नहीं थे. तू जब छोटी रही होगी तब घर में तूने बहुत चंचलता से अपने घर और अपने आस-पास के माहौल को खुशनुमा बनाया होगा.तूने अपने मम्मी पापा और भाई-बहन की छोटी छोटी ख़ुशी का ध्यान रखा होगा. तेरे जन्मदिन पे सबने खुशियाँ भी मनाई होंगी. और आज देख, तुझे एक साल हो गया गए हुए.
कुछ ख़ास तो नहीं बदला मेरी ज़िन्दगी में. लेकिन पापा और मम्मी की ज़िन्दगी में शायद सब कुछ बदल गया है. अब मम्मी तेरे लिए टिफ़िन नहीं बनाती. पापा को तेरी शादी के लिए लड़का नहीं ढूँढना अब. भाइयों के लिए एक बहन क्या होती है शब्दों में नहीं लिखा जा सकता.
ज्योति, तू एक डॉक्टर नही बन पायी लेकिन एक आदर्श बन गयी है! आदर्श हर उस लड़की के लिए जो आज भी ये सब सह रही हैं. मुझे नहीं पता तेरे जाने के बाद इस एक साल में कितनी बच्चियों की मासुमता को कुचल दिया गया लेकिन बंद नहीं हुआ ये सब.
मैं तेरा सगा भाई तो नहीं हूँ, लेकिन एक बहन मेरे भी है. समझता हूँ की एक लड़की परिवार में क्या होती है. ज़िन्दगी में एक लड़की की क्या भूमिका है. सिर्फ माँ-पापा ने ही एक लड़की को नहीं खोया है बल्कि इस देश ने एक होनहार डॉक्टर, और एक जिंदादिल ज़िन्दगी को खो दिया. पिछले एक साल में बहुत ड्रामा हुआ है. हर इंसान के मन में गुसा है, लेकिन आज भी वही सब इन्टरनेट और बॉलीवुड का गन्दा खेल चल रहा है. मैं और पूरा देश उस दिन भी दुखी थे, आज भी दुखी हैं. फर्क इतना है की पिछले साल कम से कम कुछ लोगों ने नए साले पे ख़ुशी नहीं मनाई थी, इस साल शायद मम्मी-पापा के अलावा सब हनी सिंह के गानों पे पूरी रात नाच नाच के नए साल का स्वागत करेंगे.
तेरे गुनाहगार आज भी जिंदा हैं ज्योति लेकिन उन्हें जल्द ही सजा मिलेगी ऐसा मुझे यकीन है. मैं उन्हें तड़पते हुए देखना चाहता हूँ. उनकी आँखों से खून निकलते हुए और उन्हें अपने जन्म पे पछताते हुए. कोई उन्हें भले माफ़ कर दे, लेकिन एक भाई होने के नाते मैं नहीं कर सकता!
ज्योति, मैं शर्मिंदा हूँ मेरी बहन! तूने मुझे इस जन्म में तो राखी नहीं बाँधी थी. लेकिन एक दुआ है ऊपर वाले से की तेरा अगला जन्म मेरे घर में हो! मेरी बहन या मेरी बेटी के तौर पे! वादा है मेरा, पूरी जान लगा के भी तुझे एक राजकुमारी की तरह रखूँगा! एक ऐसी राजकुमारी जिसके प्रति सबके मन में सम्मान हो! और एक ऐसे माहौल में जिसमे लोगों को बच्चियों में “cuteness” नज़र आये, उनका शरीर नहीं!
और नहीं लिख पाउँगा ज्योति, हो सके तो.... प्लीज माफ़ कर देना !!!
- तेरा एक भाई!
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