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Thursday, 8 August 2013

15 अगस्त से पहले....




जिस देश का पडोसी पाकिस्तान जैसा होता है उस देश के लिए सेना उतनी ही ज़रूरी है जितनी की मोबाइल के लिए बैलेंस. अगर बैलेंस न हो तो आप किसी को मुसीबत के समय  याद नहीं कर सकते ठीक उसी तरह देश के पास सेना न हो तो वो मुसीबत की घडी में किसी को याद नहीं कर सकता. सेना एक छोटा सा शब्द ज़रूर है , लेकिन इसका मतलब होता है एक ऐसा ग्रुप जो आपको पाकिस्तान और चाइना जैसों से बचाए, एक ऐसा ग्रुप जो आपको बाढ़ के समय आपके घर तक पहुंचाए , एक ऐसा ग्रुप जिसे साल में 10 छुट्टी भले न मिले लेकिन उसको मिलने वाले पेट्रोल पंप तक चोरी हो रहे हैं.
पाकिस्तान ने अभी जो किया वो उसकी फितरत रही है, और शर्तिया आगे भी रहेगी लेकिन गलती मेरे ही देश की तरफ से हो रही है. एक तरफ ईद का पवित्र त्यौहार है और दूसरी तरफ इन पांच जवानों के घर में पसरा मातम. किसे अपने बच्चे से साइकिल का वादा किया था तो कोई अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहता था लेकिन अब सब शांत हो चूका है. ताबूत की आखिरी कील, भीम सिंह जैसे लोगों के बयान की फौजी होते ही मरने के लिए हैं. मनमोहन सिंह जी से तो कब की आस टूट चुकी है, अब उम्मीद करे तो किससे. बचपन से एक ख्वाब था और आज भी है, की जब मरुँ तो इंडियन आर्मी के ट्रक से लाश घर पहुंचे . मुझे आर्मी से लगाव है या नहीं ये फर्क नहीं डालता इस बात पे की इंडियन आर्मी से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है आज के भारत में. मुझे ये नही पता की भारत का शीर्ष प्रबंधन बदलने से कुछ फरक पड़ेगा लेकिन एक बात तय है की भारत खतरे में है. और खतरा है वो रक्षा मंत्री जो पाकिस्तान को शाह देता है , वो सांसद जो कहता है हमारे जवान भी उन्हें मारते रहते हैं कोई बड़ी बात नहीं है, और सबसे बड़े वो जो समझते हैं की आर्मी में इंसान नहीं जानवर हैं. सरकार कुछ नहीं करेगी या कहूँ कुछ नहीं कर सकती, हमें ही कुछ करना होगा कम से कम  दो मिनट के लिए अपनी आँखे ही  नाम कर लो इन सैनिकों के लिए 15 अगस्त से पहले.........

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